गुरुवार, 7 जनवरी 2021

प्राइवेट सेक्टर

                                                                                  प्राइवेट सेक्टर

 

हमारे देश की आधी से भी ज्यादा आबादी युवा है इस तरह की बाते हम अपने देश पर गौरव करने के लिए अक्सर बोलते है ! ये गर्व का विषय भी है नेता भी अपने भाषणों में इसको गर्व से बोलते है, पर ये गर्व सिर्फ बातो तक ही सीमित रह जाता है जमीनी स्तर पर इस युवा आबादी के साथ क्या हो रहा है और वो इस को लेकर कितने गौरवान्वित है आइये इसका एक विश्लेषण करते है!!

 आज के दौर में रोज़गार देश के युवाओ से जुड़ा एक बहुत है बड़ा और मुख्य मुद्दा है, पर इस को लेकर हमारी देश की सरकार कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते है की ये चुनावो में कभी भी मुख्य मुद्दे के रूप में शामिल नही हुआ !! घूम फिर के बात जात बिरादरी या धर्म पर ही लौट आती है !! सरकार खुद की लंगोट बचाने के लिए प्राइवेट सेक्टर को हर जगह बढ़ावा दे रही है पर बिना कुछ सोचे समझे!

प्राइवेट सेक्टर मतलब मुनाफा इसको ऐसे समझ सकते है या फिर ज्यादा मुनाफा या फिर बहुत ज्त्यादा मुनाफा !! हमारे देश के कानून का हाल किसी से छुपा नहीं है ज्यादातर कानून किताबो में ही दम तोड़ते नजर आते है और एक व्यक्ति पैसे और बल की ताकत से पूरे सिस्टम को कैसे भी कही भी घूमा सकता है !!

ये दोनों चीजे मिलकर एक विकराल परेशानी को जन्म देती जा रही है और वो है इन् प्राइवेट संसथाओ का मनमाना रवैया ! हमारे देश की सरकारे जहां अपनी सत्ता को बचाने और देश को लूटने में व्यस्त है वही ये लोगे भी परिस्तिथि का फायदा उठा के मनमाने तरीके से इन संस्थाओ को चला रहे है जिस पर किसी का कोई अंकुश नहीं है ! पैसा और मुनाफा कमाने की होड़ में ये लोग हर चीज को ताक पर रखने को तैयार है, शायद इसी बात को समझते हुए किसान भी आज सडको पर है!

युवाओ की इस तरह की समस्याओ पर सरकार का कोई धयान नहीं है क्योकि उनको धर्म के नाम पर वोट मिल रहे है और जब धर्म के नाम पर वोट मिलते है तो इस तरह के मुद्दों पर कुछ न कहना और अपनी इज्जत बचा के रखना अच्छा विकल्प है!! बेलगाम होती हुई इन संस्थाओ पर लगाम लगाना बहुत ही जरूरी है वर्ना ये लोगे अपनी जेबों को भरने के लिए इस देश की युवा पीड़ी को किस हद तक शोषित करते रहेंगे ये बहुत ही भयानक है! इस समस्या को समझना और इसका समाधान निकालना बहुत जरूरी है  ! 

मंगलवार, 29 दिसंबर 2020

किसान आंदोलन २०२०




साल २०२० और किसान आन्दोलन के विषय में बहुत कुछ लिखा और पढ़ा जा चुका है!! Yotube पर इस  तरह की वीडियोज का अम्बार लग चुका  है,अखबारों में इसको लेकर तमाम लेख लिखे जा चुके है, टीवी डिबेट्स  में खूब चिल्लम चिल्ली हो चुकी है, बड़े बड़े बुद्धिजीवी इस पर अपनी राय रख चुके है!! तो कुल मिला कर कहने का मतलब है की सब मोदी सरकार द्वारा लाये जा रहे इन किसान बिलों पर अपनी राय रख चुके है!! तो अब हम क्या करेंगे?? हम यहाँ किसान बिलों की या उनसे क्या होगा या किसको फायदा मिलेगा ये छोड कर कुछ नैतिकिता की बात करते है जो किसी भी लोकतांत्रिक सरकार का आधार है!!

हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है जहां की आधी से भी ज्यादा आबादी कृषि पर निर्भर है !! सरकार को इस आबादी का कल्याण करने की इतनी जल्दी थी की कृषि सुधार बिलों को बिना सदन में वोटिंग किये या बिना किसानो की मर्जी जाने पास करवा दिया या फिर कहना ठीक होगा की थोप दिया!! मेरा एक छोटा सा सवाल है जब ७० सालो में आप किसानो का कुछ भला नहीं कर पाए तो अब इतनी जल्दी क्या थी की इन् बिलों को इतनी जल्दी पास करवा दिया गया ?? आप जिसके भले के लिए ये बिल ला रहे हो उनसे तो पूछ लेते के इस तरह काभला उनको खुद के लिए चाहिए के नहीं?? अगर एक लोकतंत्रिक देश में इस तरह से कानूनों को जनता पर लादे जाने लगा तो चीन और हममे फ़र्क क्या रह जाएगा ??

किसानो का प्रदर्शन जारी है दिल्ली के सभी बॉर्डर पर किसान डेरा डाले पड़े है!! आप स्तिथि देखिये सरकार कह रही है हम तो तुम्हारा भला और उद्धार करके रहेंगे और किसान कह रहे है हमको करवाना ही नहीं है!!  किसी  भी आन्दोलन की सफलता में  देश के विपक्ष का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है पर ये इस देश  की त्रासदी ही है की एक तो विपक्ष कही है ही नहीं और जो है वो भी विदेश घूम रहा है !! सरकार बिना समस्या जाने कानून बना रही है ये बिल्कुल वैसा ही है जैसे परीक्षा में सवाल कुछ और है और जवाब कुछ और!! जब में अपना भला कारवाना नहीं चाहता तो आपको क्यों पड़ी है भला करने की, इससे ही ये साफ़ जाहिर होता है की सरकार की नीयत कुछ और ही है!! अगर आप सच में किसान का भला करना चाहते ही थे तो पहले किसानो से पूछते तो सही के आखिर असल समस्या है क्या और उसका क्या समाधान होना चाहिए !!

सवतंत्र भारत में शायद ये पहली सरकार होगी जो शायद १२५ करोड़ लोगो की समझने की क्षमता को इस तरह तराजू में तोल रही है!! विमुद्रीकरण को भी देश का कोई भी व्यक्ति समझ नहीं पाया और वो सरकार की बहुत बड़ी उपलब्धि थी RBI रिपोर्ट के बावजूद, GST को  भी कोई समझ नहीं पाया जिससे आज  भी व्यापारी को नुक्सान हो रहा है पर वो भी बड़ी सफलता थी और वैसे ही किसान बिलों को भी कोई समझ नहीं पा रहा है और ये भी बड़ी सफलता है सरकार की !! सच में इतनी समझदार सरकार पहली बार आजाद भारत में आई है!! हमारा देश जिसके इंजीनियर, डॉक्टर आदि जो देश-विदेश की बड़ी से बड़ी संस्थाओ में  काम करते है इन लोगो ने तो उनको भी वैचारिक रूप से कंगाल साबित कर दिया है !!

ज्यादा कुछ न लिखते हुए में इस सरकार से यही उम्मीद करता हूँ की जबरदस्ती किसी का भला करना बंद करे !! अगर सच में आपकी नीयत किसानो का भला करने की है तो जमीन पर जो समस्याए है उनको जाने और किसानो के साथ बैठ कर उन समस्याओ का समाधान करने की दिशा में कुछ करे, बाक़ी  तो आप सबसे ज्यादा होशियार सरकार हो ही आज़ाद भारत की .......................!!!!!!

















प्राइवेट सेक्टर

                                                                                    प्राइवेट सेक्टर   हमारे देश की आधी से भी ज्यादा आबाद...